
#2021July5
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#happytimes
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चलो नए सिरे से इक बार लिखूँ कहानी,
फिर से
खुले सिरे इस डोर के बाँध लूँ, फिर से
कुछ फीके पड़ गये रँग भर लूँ, फिर से
कुछ अधूरे रह गए ख़ाब पूरे कर लूँ, फिर से
कुछ बीच डगर में छूटी मंजिलों को पार कर लूँ, फिर से
ये साँसें जो अब तक धीमी चल रही थी ज़रा तेज़ कर लूँ, फिर से
अब आओ पकडो मेरा हाथ एक बार, फिर से
डॉ उर्वशी ऊषा
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