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पीछे मुड़ कर देखती हूँ तो रंग और बेरंग भरी भीड़ नज़र आती है. इस भीड़ में अपना कौन है, ये पहचान मेरी समझ से बाहर है. शायद तभी इसका हिस्सा नहीं बन पाई. कुछ पर,,,,, मतलब, फायदा, धोखा, चोरी, जलन,,,,, सब ऐसे ही गहरे काले भद्दे रंग नज़र आए. पर ये रंग नहीं. ये Read more
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मुझे प्यार की हद न थी मालूम जो तुमने सिखा दी मुझमें जीवन जीने के सुर न थे जो तुमने भर डाले अपने हिस्से का जाम, ओ बेरहम! तुम चंद लम्हों में छलका कर चल दिए पर मेरी दिवानगी तो तुमने देखी नहीं लम्हा लम्हा जीती हूँ पर तुम्हारे बगैर बीता हर पल आज भी Read more
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चलो गगन के उस दूर छोर से,हम तुम पुकारा करें.तुम पहरों बैठे रहो,मैं यूंही निहारूं तुम्हें, ये टिमटिमाती रोषनियाँ,हज़ारों जुगनू भी संग गुनगुना रहे, बल खाईं घटा की तरह तुम मेरे कांधे पे सर झुका रहे. वक्त यहीं थम जाए,और हम खोए रहें नजारों में🌼🌼🌼🌼🌼डॉ उर्वशी वर्मा Read more
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I Cry,,,,, I cry. Because I am hurt. I am hurt, because I feel humiliated. I am angry because I am upset. I can’t breathe because this is suffocating for me. Why do I suffer because of my heart. Time is passing every minute and seconds. I am not happy because things are always for Read more
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अब मुझे अकेले घूमना अच्छा लगता है बंदिशों की दुनियाँ से परे, जहां चाहूं निकल जाऊँ, देर तक हाथों में चाय लिए, एक ही बेंच पर बैठे रहना, आती जाती भीड़ में, कुछ परेशान, बौखलाये, चिड़चिड़े, लड़ते, चेहरों को देखते रहना आदत बनती चली गई.कुछ मनचले जवान बच्चों को देख सोच मे पड़ जाती, ये Read more
