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  • सफ़र

    वजह तो कुछ भी नहीं इस, rat race की. पता नहीं क्यूँ सुबह से ही यह सिलसिला शुरू हो जाता है, ये जल्दी से खत्म करो…..वो जल्दी करो … ये जल्दी वो जल्दी की भागम-भाग ने मेरे ज़हन में एक बहुत बुरी आदत भर डाली. मेरे दिमाग़ के एक कोने में घड़ी फिट करदी, ख़ुद Read more

  • तेज़ हवा की सांय- सांय से दरवाज़ा बार- बार हिल रहा था, शायद चिटकनी भी ढीली थीं, हिलने की आवाज़ ऐसी लग रही थी कि कोई पकड़ कर हिला रहा है. दिसंबर महीने की ठंड अपने पूरे जोश में थी, करीब 8.30pm से 9.00 बजे थे, सर्द हवा इतनी तेज़ बह रही थी मानों आज Read more

  • One fine day, the surroundings were looking so pretty, though hot. I was enjoying it as usual with soft music around.🎶🎶 But Palampur is so unpredictable, you never know, what will happen next moment,🌧️ In no time, this piece of land was woven with white shining pearls, roaring, ripples and many more beautiful bells mesmerized Read more

  • तुमसे चोरी मैं तुम्हारी बाँसुरी छू लूँ तुम हाँ कहो तो, एक  बार बजा लूँ जो तान तुम चाहो मैं वही गा कर तुम्हें सुनाऊँ तुम्हारे माथे का पंख मैं अपने बालों में सजा लूँ अपने माथे की बिंदिया मैं तेरे माथे सजा दूँ बस एक बार तुम्हें राधिका बना दूँ ओ कान्हा, एक बार Read more

  • बारिश

    नन्ही नन्ही बूंदन, बरस बरस घन आज बरस रहे बीजुरिया चमके, जिया डरपावे, हे री सखी, काहे श्याम नही आये मैं मग रोके खड़ी मोरे श्याम अभी नहीं आए.. डॉ उर्वशी वर्मा 📝🕊️🕊️ Read more

  • नाराज़गी इस क़दर बढ़ती गई, बढ़ती गई और हम दोनों के बीच एक गहरी ख़ामोशी ने अपनी जगह बना ली. और जब कभी बात होती, तो हमेशा की तरह हम बहस में इतने गहरे उतर जाते. कि फिर से एक लंबी ख़ामोशी. खिड़की के कांच से सुबह 6.22 पे बाहर देखा. घर के बाहर और Read more

  • या मेरे मौला, दिल को कुछ सुकून देदे, या फिर कोई नई राह दिखा. अब साँसें बोझिल लगने लगी इन पत्थरों के शहर में, एक नरम खुशनुमा आवाज़ सुना दे आह! कुछ नया दिखा दे डॉ उर्वशी वर्मा….. 12अप्रैल ,2019. 2.45 pm Read more

  • तेरी चौखट

    लो एक बार फिर आ गिरी तेरी चौखट पर, तुम नहीं चाहते मैं तुमसे दूर जाऊँ. देखो! इतना प्रेम भी अच्छा नहीं. जैसे ही तुमसे दूर होकर ख़ुद के पंख फैला उड़ना चाहती हूँ, जीवन में नए रंग भरती हूँ. एक ही झटके में वापस खींच लेते हो. तुम मुझसे जलते हो. क्या इसीलिए मुझे Read more

  • हम दोनों

    तुम न होती हर पल मेरे संग तो ये जीना इस क़दर मुमकिन न था था वो बचपन तुम्हारा पर बूढ़ों सी कहानियां बातेँ करती न थकती बड़ी अजब सी शैतानियाँ अपने नन्हें हाथों से चाय की ट्रे सजा मेरी थकान मिटाई बचपन से ही कुछ अलग करने की ठान ली तभी तो इक नयी Read more

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