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  • पीड़ा

    कल तुमने  सही कहा, “ख़ुद चली जाती हो वहाँ”. मैं तो सिर्फ एक ज़रिया हूँ…… इन गए सालों में भीतर ही भीतर जमा होता उनकी यादों का, एक-एक किस्सा गहरा होता रहा. ख़ुद को उसमें डुबोया रखने के लिए, कई  संजीदा गाने मुझे मरहम लगते हैं. (जैसे कि एक शराबि जाम पीने का माहौल बनाता Read more

  • ESSSSCAAAAPE_2 ??

    It was a drowned body and soul and me,,, 😥 Just wanted solitude, no reasons. Sometimes you want to be with yourself only. A person like me mostly surrounded by happy faces, showered with so much love.❤️🥀I reciprocate the same way, no doubts.🌼🌼❤️ But at the same time i need a corner to sit quietly Read more

  • The first film of Indian cinema which I watched along with the entire school. It was a Great day for me, going out for a film….. 1964 ❤️ I still remember, through out the film, I kept crying., the beautiful song….. चलो चले माँ, सपनों के गाँव में… And I watched the movie today again, Read more

  • फिर एक बार

    उसके अभिमान की दीवार बड़ी होती गई मेरी चौखट उससे दूर होती गयी रिश्ता अब सिर्फ़ साँसों का है रूबरू हुए मुद्दत हुई……🌼🌼🌼🌼🌼 डॉ उर्वशी वर्मा Read more

  • शुरू कहाँ से करूँ, ये समझ नहीं पा रही. लगता है इन गुज़रे सालों मे न जाने क्या-क्या कर डाला मैंने. बोहोत सा खुली आंखों से और कुछ आँखे बंद करके. सफ़र जैसा भी रहा, नियति ने सिखाया जी भरके. 📝 Read more

  • बेखौफ अक्स

    बहुत सीखा है तुझसे मैंने, “ऐ मौसम“ हजारों आए, तुझ पर शायरी की, तेरे फूल, पत्ते, बादल, बारिश पर कसीदे पढ़े गए तीखी गर्मी, तेरे तूफान को कोसा गया पर तू टस से मस न हुआ तू हर बरस ऐसे ही आ मुझमें मेरा खोया अक्स फूँक जा. 🌼🌼🌼🌼🌼. डॉ उर्वशी ऊषा 📙📗🖋️ Read more

  • लम्हे

    हर पल लम्हे आ रहे हैं,क्या ख़बर के आ रहे हैं 🤔या बिन पढ़े पन्नों की मानिंद जा रहे हैं 🤔डॉ उर्वशी ऊषा 📙🖋️ 29 July, 2019. 8.49 am Read more

  • ऊँचे शिखर

    ऐ ऊँचे शिखर, क्यूँ इतना अभिमान करते हो अपनी ऊँचाई पर. अगर मैं नज़र भर, अपना सिर ऊँचा कर, तुम्हारी ओर न देखूँ, तुमसे नज़रें न मिलाऊँ. तो क्या करोगे तुम इस ऊंचाई का. कैसे कर लोगे ख़ुद पर इतना अभिमान.. अपना इतना चौड़ा विशाल सीना……… 📝 Read more

  • ये आप ही हो, उसने Mobile में फोटो दिखाई. नहीं, मेरी नहीं है यह. मेरी ही फोटो, वो मुझे दिखा रहा था, किस कदर झूठ कह दिया मैंने. वो बेचारा कभी mobile देखता, कभी मेरी शक़्ल. और वो दरवाज़े पर ही खड़ा था, मैंने अब दूसरा झूठ कहा, मुझे देर हो रही है, पौधों में Read more

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